नकद आरक्षित अनुपात यानी कैश रिजर्व रेशो (Cash Reserve Ratio) या सीआरआर. रिजर्व बैंक अधिनियम की धारा 42(1) के अन्तर्गत अनुसूचित बैंकों को यह अनिवार्य है कि वे अपनी जमाराशि के कुछ अनुपात के बराबर रकम रिजर्व बैंक के पास नकद रूप में जमा रखें.
भारतीय रिजर्व बैंक (संशोधन) विधेयक, 2006 के अस्तित्व में आने के बाद 42 (1) की उपधारा में संशोधन कर दिया गया. अब भारतीय रिजव बैंक अनूसचित बैंकों के लिए किसी भी आधार दर या अधिकतम सीमा के बिना सीआरआर तय कर सकता है.
इससे पहले रिजर्व बैंक को यह अनुपात 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक कर सकता था। इस अनुपात में बढोतरी होने पर बैंकों के पास नकद कोष में कमी हो जाती है जिसके कारण ऋणों और अग्रिमों की मात्रा भी कम हो जाती है.