मार्तिना हिंगिस : जुनूं की इक मंजिल

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यह साल 2017 के उतरते अक्तूबर की बात है। जब डब्ल्यूटीए के युगल में हार के साथ ही मार्तिना हिंगिस ने टेनिस को अलविदा कहा। हमारे यहां जब कार्तिक उतर रहा था तो सिर्फ टेनिस खेलने के लिए ही जन्मी, इस दौर की सबसे ‘इंटेलीजेंट’ टेनिस खिलाड़ी रैकेट खूंटी पर टांगने की घोषणा की। मार्तिना हिंगिस के नहीं होने से टेनिस कोर्टों की चमक या चौंध पर कोई असर नहीं पड़ा और न पड़ेगा लेकिन तमाम वर्जनाओं को रौंधने की उसकी जीवटता को हमेशा याद रखा जाएगा। भले ही वह टेनिस के महानतम खिलाड़ियों की सूची में शामिल होने से एक दो कदम चूक गई हो।

दरअसल हमारे लिए मार्तिना एकमात्र ऐसी एथलीट रही जिसके जन्म लेने से पहले ही तय हो गया था कि वह टेनिस खेलेगी। मार्तिना हिंगिस की मां और टेनिस खिलाड़ी मेलेनी, दिग्गज मार्तिना नवरातो​लिवा की धुर प्रशंसक थी। मार्तिना हिंगिस जब गर्भ में थी तभी उसका मार्तिना नाम व खेल टेनिस तय हो गया। ​शायद इसी तैयारी और मां के सपनों ने मार्तिना का प्रारब्ध लिख दिया। उसे टेनिस में होना था, वह टेनिस में हुई .. टेनिसमय हुई। उसमें न तो अन्ना कोरनिकोवा जैसे ग्लैमर था न ही वह सेरेना और वीनस विलियम्स जैसी ताकत वाली थी। अपनी पांच फुट सात ईंच के कद व साधारण काठी के बावजूद मार्तिना ने टेनिस में अपनी सफलता के झंडे ही नहीं गाड़े 15-16 साल की साल में तो वह इस खेल की राजकुमारी हो गई।

बाइस साल की उम्र में, ऐसी उम्र में जबकि ज्यादातर खिलाड़ी रैकेट के भार को आंकना शुरू करते हैं मार्तिना ने चार ग्रेंड स्लेम जीत के साथ पहली बार मैदान से हटने की घोषणा की। अपने रिटायरमेंट से खेल जगत को सकते में डाल दिया। तब ऐसा लगा कि यूरोप के खेले खाये समाज की, जीत-जीत कर अघा गई नवयुवती अपनी मां की आकांक्षाओं व खेल की अपेक्षाओं का बोझ उतार फेंकना चाहती है। जीतना जैसे उसके बांये हाथ का खेल हो गया था। वह चाहती थी कि अपने गांव लौट जाए, घुड़सवारी करे और पढ़ाई पूरी करे। लेकिन उसकी नाड़ तो टेनिस से बंधी थी इसलिए उसे लौटना तो यहीं था। रिश्तों में आई कड़वड़ाहट को पीती, टू​टी यारियों के जख्मों को ढंकती मार्तिना कोर्ट पर लौट आई और अगले 11-12 साल टेनिस को जीती, जीतती चली गई। बीच में एक रिटायरमेंट के साथ वह पांच साल तक टेनिस मैदान से दूर रही। लेकिन जब भी लौटी और अधिक परिपक्वता व प्रतिबद्धता के साथ।

मार्तिना के करियर को याद करते हुए मोनिका सेलेस, मेरी पियर्स, जस्टिन हेनिन हार्डिन, लिंडसे डेवनपोर्ट व जेनिफर केप्रियाती जैसी अनेक दिग्गज टेनिस खिलाड़ी के नाम आते हैं। लेकिन मार्तिना इन सबमें किसी न किसी रूप अलग रही। कदकाठी या शारीरिक सौष्टव में भले ही वह अपनी समकक्ष खिलाड़ियों से 19 रही लेकिन टेनिस की बारीकियों, खेलते समय टाइमिंग में उसका कोई सानी नहीं रहा। होता भी कैसे टेनिस उसके डीएनए में जो समाया था जो उसे कोर्ट पर खींच कर लाता रहा। आलोचकों ने जब जब उसे खारिज करने की कोशिश की वह कहीं मजबूत होकर कोर्ट पर लौटी।

आंकड़ों में दर्ज है कि चौदह साल की उम्र में पेशेवर टेनिस में उतरी मार्टिना हिंगिस ने 1994 से 2017 तक 23 साल के अपने करियर में कुल मिलाकर 43 एकल व 64 युगल खिताब जीते। उसने अपने सभी पांच ग्रेंड स्लैम खिताब 1996 से 1998 के दौरान दो साल में जीते। चार साल की उम्र में प्रतियोगी टेनिस की दुनिया में कदम रखने वाली मार्टिना ने 12 साल की उम्र में जूनियर ग्रेंड स्लेम टाइटल जीता। 16 साल की उम्र में आस्ट्रेलियाई ओपन जीतकर वह ग्रेंड स्लेम जीतने वाली अपनी तरह की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गई।

मार्तिना का भारत व भारतीय खिलाड़ियों से गहरा नाता रहा। सानिया मिर्जा के साथ जोड़ी बनाकर उसने 2015 में विंबलडन व अमेरिकी ओपन तथा 2016 में आस्ट्रेलियाई ओपन जीता। मार्तिना ने मिश्रित युगल में सात ग्रेंड स्लेम खिताब जीते जिनमें से चार में उनके साथी लिएंडर पेस थे तो एक में महेश भूपति।

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