चित्तौड़गढ़: किलों का महाराणा

चित्तौड़गढ़। यह देश का सबसे बड़ा, सबसे चर्चित किला या दुर्ग है। कहा भी जाता कि गढ़ तो चित्तौड़गढ़ और सब गढैया हैं। लगभग 180 मीटर ऊंची पहाड़ी पर 600 एकड़ में फैले चित्तौड़ के इस ऐतिहासिक के लिए सूरज आज भी पूरब में उगता है और पश्चिम में अस्त हो जाता है। किले के पिछले दरवाजे से आने वाले पर्यटकों के लिए एतिहासिक आख्‍यानों का सिलसिला विजय स्तंभ से शुरू होकर स्थानीय आदिवासियों द्वारा शरीफे यानी सीताफल से बनाई गयी विशेष रजाइयों व दूसरे उत्‍पादों पर खत्‍म हो जाता है। गाइडों के पास पीढ़ी दर पीढ़ी सुने इतिहास का रोचक वृतांत है। इसमें शासकों की शौर्य गाथाएं, एतिहासिक लड़ाइयां व जीते हैं।

स्‍थानीय गाइडों के पास पीढ़ी दर पीढ़ी सुने इतिहास का रोचक वृतांत है। इसमें शासकों की शौर्य गाथाएं, एतिहासिक लड़ाइयां व जीते हैं। वे बताते हैं कि किस तरह दो दर्जन से अधिक हमलों को अपने सीने पर सफलतापूर्वक झेलने वाला यह किला केवल तीन, केवल तीन युद्धों में हारकर खंडहर में बदल गया।

“चित्‍तौड़ में देखने के लिए खंडहर, सुनने के लिए गौरवशाली इतिहास, खाने के लिए शरीफा और ले जाने के लिए जौहर की माटी है।“ गाइडों का यह तकिया कलाम दिन में कई बार सुनने को मिल जाता है।

कई एकड़ में फैले देश के इस सबसे बड़े किले के एक बड़े हिस्‍से में अब शरीफे की खेती होती है। किले के सामने वाले दरवाजे सूरजपोल से नीचे भी शरीफे के पेड़ों का जंगल दिखता है। घोड़ों की टापों और तलवारों की टंकारों से गुंजायमान रहने वाली चित्‍तौड़  की एतिहासिक रणभूमि में इन दिनों शरीफे के पेड़ हैं या गेहूं के खेत लहलहाते हैं। एक राजमार्ग है जो इस युद्धभूमि को मानों तलवार की तरह काटता हुआ निकल जाता है। उसके पार सोए हुए इंसान की आकृति का एक पहाड़ है। उसके बाद एक कतार में पहाडियां सर झुकाएं बैठी लगती हैं।

लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि मीलों मील की परिधि में सात दरवाजों से घिरा यह ऐतिहासिक किला अपने हर शूरवीर, अपनी हर घटना को इतिहास में प्रामाणिक रूप से दर्ज करता हुआ चलता है। चाहे वह विजय स्तंभ, कीर्ति स्तंभ हो या भीम कुंड और पन्नाधाय महल। जैमल पत्ता का तालाब हो, ​गोमुख कुंड या भामाशाह की हवेली और रानी पद्मिनी का महल,  मोतीबाजार के खंडहर हो,  सूरजकंड या गोरा बादल की घुमरें। इस किले ने राजा से लेकर प्रजा तक, रानी से लेकर धाय और राणा से लेकर सिपाही तक अपने हर उस शूरवीर को इतिहास में बाकायदा दर्ज किया है जिसने मेवाड़ के इस गौरव को बचाये रखने में योगदान किया।

भले ही खंडहर हों लेकिन अब भी इस​ किले में देखने के लिए इतना कुछ है कि इतिहास विषय को दुबारा पढ़ने का मन करे।  यहां देखे जाने लायक जगहों में विजय स्तंभ, कीर्ति स्तंभ, रानी पद्मिनी महल, गोमुख कुंड, भीम कुंड, सूरजपोल, जैन मंदिर, समाधिश्वर, महासती या जौहर स्थल, सतबीस देवला, महाराणा कुंभा महल, गौरा बादल महल, मीराबाई का मंदिर शामिल है।

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