ढाणी की कहानी

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ढाणी राजस्थान से लेकर पंजाब व हरियाणा सहित अनेक राज्यों की बसावट का अभिन्न हिस्सा रही है।

खेत में रहने के लिए बनाए घर को ही ढाणी कहा जाता है। यह राजस्‍थान और कई राज्‍यों की बसावट की विशेषता है जिसके बारे में ज्‍यादातर लोग जानते नहीं। लोगों ने ढाणी के बारे में सुना है तो लेकिन वे नहीं जानते कि इसका मतलब क्या होता है। उदाहरण के लिए राजस्‍थान को ही लें।

रेत, ऊंट, दुर्जेय दुर्ग और बड़े-बड़े महल.. राजस्‍थान की बात करते समय आमतौर पर यही पांच दस शब्‍द हैं जो कहे या सुने जाते हैं। वहां के गांवों, चकों और ढाणियों की बात कोई नहीं करता। ढाणी तक तो बात पहुंचती ही नहीं। जबकि सचाई यही है कि राजस्थान के ग्रामीण जीवन की चर्चा ढाणी के जिक्र के बिना पूरी हो ही नहीं सकती।  ढाणी केवल राजस्‍थान नहीं, समूचे थार और आसपास के इलाके की अनूठी विशेषता है। यहां के लोकजीवन में ढाणी का ऐतिहासिक व सांस्‍कृतिक महत्‍व है।

तो सवाल  कि ढाणी क्या है?  दरअसल ढाणी को मानवीय बसावट की सबसे छोटी इकाई माना जाता है। घर, आंगन और ढाणी।  ढाणी शब्द संभवत: धानी से आया है जिसका अर्थ बसावट होता है। जैसे राजधानी। शायद धानी का अपभ्रंश ही ढाणी हो गया। ढाणी का शाब्दिक अर्थ तो है- खेत में घर बसाना . ढाणी का थोड़ा व्‍यवस्थित तथा बड़ा रूप चक है। फिर गांव आते हैं. चकबंदी नहरी प्रणाली के बाद हुई और गांव तो समाज की अपने आप में एक प्राचीन अवधारणा है। ढाणी दूरदराज के खेतों में इतने एकांत में होती थी कि कई बार दो आसपास की आबादी चक गांव पांच दस किलोमीटर दूर होता है। यानी चारों तरफ खेत, जंगल से घिरी होती थी ढाणी।

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