राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना

केंद्र सरकार ने किसानों की आय को दोगुना करने के उद्देश्य से ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना (ई-नाम) योजना प्रायोगिक आधार पर अप्रैल 2016 में शुरू की।

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने एक जुलाई 2015 को 200 करोड़ रुपये के बजट आवंटन के साथ राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM scheme) स्कीम को मंजूरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अ्प्रैल 2016 को आठ राज्यों की 21 मंडियों को “ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम)” योजना के रूप में जोड़कर इसकी प्रायोगिक परियोजना के रूप में शुरुआत की।

दरअसल यह योजना किसानों में आनलाइन व्यापार के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल प्रदान करती है और पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी मूल्य की खोज को सक्षम करती है। योजना के तहत एकीकृत विनियमित बाजारों में आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए उन्हें 30 लाख रुपये प्रति मंडी की दर से सहायता दी जाती है। इस वर्ष के बजट में इस राशि को रु.75 लाख तक बढ़ा दिया गया है।

इस योजना का प्रमुख उद्देश्य यही है की किसान एक स्थान पर बैठकर देश की विभिन्न मंडियों का भाव जान सके और जहाँ पर तथा जो खरीदार उनको ज्यादा पैसा दे, किसान पारदर्शी तरीके से अपनी उपज उन्हें बेच सके। इस योजना का एक महत्वपूर्ण अवयव यह भी है कि किसान को अपनी उपज का मूल्य गुणवत्ता अनुसार मिलना क्योंकि उपज पर इलेक्ट्रॉनिक बोली लगने के पहले किसान की उपज की गुणवत्ता की जांच करनी है।

सरकार ने 18 जुलाई 2017 को संसद में सूचित किया कि राष्ट्रीय कृषि बाजार के तहत पूरे भारत में इलेक्ट्रॉनिक आधार पर कारोबार करने की योजना है। इस योजना का उद्देश्य साझा ई-बाजार के जरिये 585 नियमित बाजारों को जोड़ना है। हर राज्य को तीन प्रमुख सुधार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिनमे इलेक्ट्रॉनिक कारोबार को अनुमति, पूरे राज्य में एकल लाइसेंस की मान्यता और एकल बाजार शुल्क शामिल हैं। राष्ट्रीय कृषि बाजार के अन्तर्गत 13 राज्यों के 455 बाजार आ गये हैं।

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