किसान ब्याज सहायता योजना

किसान ब्याज सहायता योजना (आईएसएस) दरअसल किसानों को दिए जाने वाले रिण की ब्याज दर कम रखना है। इसके तहत किसानों द्वारा लिए जाने वाली अल्पावधिक फसली रिण पर ब्याज का कुछ हिस्सा सरकार चुकाती है। यानी किसानों के लिए वह सस्ते ब्याज वाले रिण में बदल जाता है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य यही है कि किसानों को महाजनों और दूसरे स्रोतों से ऊंची दर पर कर्ज नहीं लेना पड़ेगा।

यह योजना वर्ष 2006-07 से चल रही है। इसके तहत किसानों को अधिकतम तीन लाख रुपये का रियायती फसल ऋण 7 प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध कराया जाता है। इसमें 3% अतिरिक्त अनुदान का प्रावधान भी है। शीघ्र भुगतान के लिए ऋण प्राप्त करने की तिथि से एक वर्ष के भीतर की अवधि है। संकटापन्न विक्रय की रोकथाम के उपाय के रूप में किसान क्रेडिट कार्ड धारक लघु और सीमांत किसानों के लिए अधिकतम 6 माह के लिए निगोशिएबल वेयरहाउस रिसीट के तहत मान्यताप्राप्त भंडारगृहों में भंडारण के लिए फसल पश्चात ऋण सुविधा उपलब्ध है। वर्ष 2016 -17 के दौरान, लघुकालिक फसल ऋण के लिए 6,15,000 करोड़ रुपए के निर्धारित लक्ष्य को पार करके 6,22,685 करोड़ रुपए के ऋण प्रदान किए गए।

वित्त वर्ष 2017—18 के लिए मंजूरी: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 जून 2017 को अपनी बैठक में फैसला किया किया किसानों को अल्पावधि फसली कर्ज सात प्रतिशत की सस्ती दर पर मिलता रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने इसके लिए 20,339 करोड़ रुपये के कोष को मंजूरी दी।योजना का कार्यन्वयन राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास बैंक :नाबार्ड: और रिजर्व बैंक द्वारा किया जायेगा।

सरकार ने कहा कि जो किसान नियमित रूप से सही समय पर अपने कर्ज का भुगतान करते हैं उन्हें चार प्रतिशत की घटी दर पर यह रिण उपलब्ध होगा। किसानों को फसल के लिये सस्ता कर्ज मिलता रहे इसके लिये सरकार ने 20,339 करोड़ रुपये के कोष को मंजूरी दे दी है।

योजना की मुख्य विशेषताएं:

  • केंद्र सरकार वर्ष 2017-18 के दौरान अधिकतम 1 वर्ष के लिए अधिकतम 3 लाख रुपये के लघुकालिक फसल ऋण का समय पर भुगतान करने वाले सभी किसानों को प्रतिवर्ष 5% ब्याज अनुदान देगी। इस तरह किसानों को केवल 4% ब्याज देना होगा। यदि किसान समय पर लघुकालिक फसल ऋण का भुगतान नहीं करता है तो वह उसे 2% ब्याज अनुदान ही मिलेगा
  • केंद्र सरकार वर्ष 2017-18 के लिए ब्याज अनुदान के रूप में लगभग 20,339 करोड़ रुपए उपलब्ध कराएगी।
  • ऐसे लघु और सीमांत किसानों को राहत प्रदान करने के क्रम में, जिन्होंने अपने उत्पाद के फसल पश्चात भंडारण के लिए 9 प्रतिशत की दर पर कर्ज लिया है, केंद्र सरकार ने अधिकतम 6 माह के कर्जे के लिए 2 प्रतिशत ब्याज अनुदान, यानी 7% की प्रभावी ब्याज दर को मंजूरी दी है।
  • प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करने के लिए भुगतान राशि पर पहले वर्ष के लिए बैंकों को 2 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाएगा।
  • यदि किसान समय पर लघुकालिक फसल ऋण का भुगतान नहीं करते हैं तो वह उपर्युक्त के स्थान पर 2 प्रतिशत ब्याज अनुदान के लिए पात्र होंगे।
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