रैंसमवेयर साइबर हमला

रैंसमवेयर क्या है: सीधे शब्द में रैंसमवेयर एक तरह का वायरस है। या कि मालवेयर है। प्रभावी होने पर यह किसी भी कंप्यूटर को बंद कर देता है और उसे खोलने के लिए या फिर शुरू करने के लिए रैंसम यानी फिरौती मांगता है। इसमें साइबर अपराधी फाइलों को अनलाक करने के लिए 300 अमेरिकी डॉलर मूल्य की डिजिटल मुद्रा बिटकायन की मांग करते हैं। इस साइबर हमले का उद्देश्य उगाही करना है। इसके तहत उगाही के लिए अस्पतालों, दूरसंचार कंपनियों और अन्य कंपनियों के कम्प्यूटर डाटा हैक कर लिए गए।

चर्चा में आया: रैंसमवेयर वानाक्राई (ransomware wanna cry) मई 2017 के पहले पखवाड़े में 12-13 मई को चर्चा में आया। इसने दुनिया भर में खलबली मचा दी। इससे अपनी तरह का सबसे बड़ा साइबर हमले के रूप में देखा गया। इसे सबसे पहले इसे अमेरिका में पकड़ा गया। देखते देखते ही इसने दुनिया भर में अनेक देशों में लाखों कंप्यूटरों को अपनी चपेट में ले लिया। इसकी सबसे अधिक मार माइक्रोसाफ्ट के एक्सपी जैसे पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले कंप्यूटर इस मालवेयर से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं।

असर: इस साइबर हमले से 150 से अधिक देशों में 2,00,000 इकाईयां प्रभावित हुई हैं।

कैसे फैलता है: यह वायरस या मालवेयर ईमेल के जरिए फैलता है। कंप्यूटर का उपयोग करने वाले को ईमेल आती है। उसके एटैचमेंट को डाउनलोड करने पर वायरस कंप्यूटर में फैल जाता है। ‘वानाक्राई’ या ‘वानाक्रिप्ट’ नाम का रैंसमवेयर कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क को इनक्रिप्ट करता है और फिर उसी लोकल एरिया नेटवर्क पर कंप्यूटरों में फैलता है। यानी इसकी चपेट में आते ही कंप्यूटर लाक हो जाता है।

भारत में असर: भारत सरकार ने बार बार दोहराया कि भारत में रैंसमवेयर वानाक्राई का कुछ अधिक असर नहीं हुआ। केरल व पश्चिम बंगाल में कुछेक कंप्यूटरों के इसके प्रभावित होने की रपटें आईं। केंद्रीय आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इसका भारत पर अधिक असर नहीं हुआ। कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ऑफ इंडिया (सीईआरटी-इन) ने भी कहा कि उसे कोई औपचारिक रपट इस बारे में नहीं मिली है। वहीं साइबर सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराने वाली क्विकहील ने दावा किया कि भारत में रैंसमवेयर हमले के 48000 मामले देखे गए हैं।

किसने फैलाया: आखिर रैंसमवेयर वानाक्राइ के पीछे किसी छोटे मोटे साइबर अपराधी का हाथ है या यह कोई सुनियोजित चाल है। साइबर सुरक्षा कंपनी सिमनटेक व कैस्परस्की लैब ने इस हमले के पीछे उत्तर कोरिया के हाथ का इशारा किया।
बचाव का उपाय: अपने ईमेल में आने वाली किसी भी अज्ञात अटैचमेंट को डाउनलोड नहीं करे। कोई अज्ञात ईमेल लिंक डाउनलोड नहीं करें। एंटीवायरस सहित अन्य सुरक्षात्मक उपाय अपडेट रखें।

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