देश में कृषि श्रमिकों की संख्या बढ़ी

देश में खेती बाड़ी के काम में लगे कृषि श्रमिकों (Agricultural Labourers) की कुल संख्या में पिछले कुछ साल में बढोतरी हुई है. कृषि श्रमिक दिहाड़ी या मासिक/ सालाना आधार पर काम करने वाले मजदूर होते हैं जो किसान की खेती बाड़ी के विभिन्न कामों में मदद करते हैं.

जनगणना 2011 के अनुसार देश में कृषि श्रमिकों की कुल संख्या 2001 में 10.678 करोड़ थी जो 2011 में बढ़कर 14.433 करोड़ हो गई.

सरकार ने बजट सत्र 2015 में लोकसभा में सूचित किया कि कृषि श्रमिकों की कमी से खाद्य फसलों की खेती पर प्रतिकूल असर पड़ने के कोई संकेत नहीं हैं. ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा किये गये अध्ययन के अनुसार मनरेगा के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से मजबूरीवश पलायन में गिरावट आई है तथा ग्रामीण मजदूरी में पर्याप्त वृद्धि हुई है.

वैसे सरकार खेतीबाड़ी में मानव श्रम का योगदान कम करने तथा यांत्रिकीकरण को बढावा देने के लिए कई योजनाएं चल रही है. इसके तहत कृषि उपकरणों की खरीद के लिए फार्म अभियांत्रिकीकरण कार्यक्रमों के अंतर्गत किसानों को सहायता दी जाती है.

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