सब्सिडी की अवधारणा

सब्सिडी (subsidy) को हम सरकारी मदद या राजकीय सहायता, राज सहायता भी कह सकते हैं. हमारे यहां तीन तरह की मुख्य सब्सिडी हैं जिनमें खाद्य, उर्वरक व पेट्रोलियम सब्सिडी शामिल है.

दरअसल सब्सिडी सरकार देती है. वह उत्पादकों, वितरकों अथवा निर्यातकों को आर्थिक राहत पहुंचाने के लिए वित्तीय अनुदान के रूप में राजकीय सहायता प्रदान करती है जिनका उद्देश्य वस्तुओं के मूल्यों को कम रखना होता है. इसी वित्तीय मदद/राहत को ‘सब्सिडी’ कहा जाता है.

इसे यूं भी समझा जा सकता है. माना कि रसोई गैस सिलेंडर की वास्तविक लागत या बाजार मूल्य 600 रुपए है लेकिन वह हमें 400 रुपए में मिलता है. इसका मतलब बाकी के 200 रुपये सरकार उस कंपनी को देती है ताकि वह हमें सस्ता पड़े. तो सरकार की यह 200 रुपए प्रति सिलेंडर की आर्थिक मदद ही सब्सिडी हुई.

देश में पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, उर्वरक आदि पर सब्सिडी दी जाती है. हज सब्सिडी भी प्रचलन में है. हालांकि हाल ही के वर्षों में इस तरह की सब्सिडी पर सवाल उठने लगे हैं और इसे समाप्त करने की बात हो रही है.

दरअसल देश के आम बजट में सब्सिडी का बड़ा हिस्सा है. उदाहरण के रूप में वित्त वर्ष 2015—16 में खाद्य, उर्वरक व पेट्रोलियम सब्सिडी 2,27,387.56 करोड़ रुपए रहने का अनुमान आम बजट में लगाया गया है. यह बड़ी राशि है, जीडीपी का लगभग दो प्रतिशत.

भारत का  सब्सिडी बिल:
भारत का ​सब्सिडी बिल (subsidy bill) बहुत बड़ा है. वित्त वर्ष 2014-15 में यह कुल जीडीपी का लगभग दो प्रतिशत रहा.

सरकार ने एक फरवरी 2017 को आम बजट में वित्त वर्ष 2017-18 में खाद्य, उर्वरक और पेट्रोलियम सब्सिडी तीन प्रतिशत अधिक बढ़कर 2.4 लाख करोड़ 2,40,338.6 करोड़ रुपए रहने का अनुमान लगाया।

संशोधित बजट अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 में सब्सिडी बिल 2,32,704.68 करोड़ रुपए रहना अनुमानित है। सरकार ने वित्त वर्ष 2017-18 में खाद्य सब्सिडी (food subsidy) के लिए 1,45,338.60 करोड़ रुपए रखे हैं। 2016—17 के संशोधित अनुमान में इसे 1,35,172.96 करोड़ रुपए रखा गया।

खाद्य सब्सिडी बिल मौजूदा वित्त वर्ष में अधिक रह सकता है क्योंकि सरकार ने नवंबर 2016 से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत 80 करोड़ लोगों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराना शुरू किया है।

इसी तरह 2017-18 के लिए उर्वरक सब्सिडी (fertiliser subsidy) को 70,000 करोड़ रुपए पर कायम रखा गया है। पेट्रोलियम सब्सिडी (Petroleum subsidy)  को 2017-18के लिए घटाकर 25,000 करोड़ रुपए किया गया है। 2016—17 में यह अनुमानित 27,531.71 करोड़ रुपए रही। 2017—18 के लिए 25,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी में से 16,076.13 करोड़ रुपए एलपीजी सब्सिडी तथा शेष केरोसिन के लिए रखे गए हैं।

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